लॉकडाउन में हॉस्टल से घर लौटी बच्ची की कहानी; गांव के बच्चे ऑनलाइन क्लास से महरूम थे तो आठवीं की अनामिका बन गई शिक्षक
कोरोना की वजह से स्कूल बंद है। दूरदराज इलाकों में बच्चे ऑनलाइन एजुकेशन से भी महरूम है। ऐसे में गांव के बच्चों को पढ़ाई से दूर होता देख आठवीं कक्षा की छात्रा अनामिका खुद शिक्षिका बन गई है। 13 साल की अनामिका हर रोज गांव के बच्चों को पढ़ा रही है। वह केरल के पलक्कड़ जिले के आदिवासी गांव अटापाड़ी गांव की रहने वाली है।
जवाहर नवोदय विद्यालय में पढ़ती है अनामिका
अनामिका जवाहर नवोदय विद्यालय में पढ़ती थी। लॉकडाउन लगने के बाद वह गांव लौटी। उसने देखा कि उसकी ही तरह बाकी बच्चों के पास भी ऑनलाइन क्लास के लिए ना स्मार्टफोन थे और ना बिजली। ऐसे में अनामिका ने बच्चों को पढ़ाने की ठानी। उसने अपने पापा की मदद से एक छोटी सी क्लासरूम बनाई और इस क्लास का नाम रखा मेरे गांव की स्मार्ट क्लास।
योगा, बागवानी और पर्सनल हाइजीन की भी देती है शिक्षा
प्लास्टिक का बोर्ड बनाया। शुरुआत में बच्चों को पढ़ाने के लिए घर-घर गई और उन्हें क्लास में आने के लिए कहा। धीरे- धीरे बच्चे जुड़ते चले गए। अनामिका को इंग्लिश, मलयालम, हिंदी, तमिल और जर्मन भाषाएं आती है, जो अपने स्कूल में सीखी है। इसके अलावा अनामिका बच्चों को योगा, बागवानी और पर्सनल हाइजीन की भी शिक्षा देती है।
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